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ALLAHABAD HC : शस्त्र लाइसेंस पर भड़का हाई कोर्ट…राजनीतिक प्रभाव रखने वाले कुछ रसूखदार की जानकारी छिपायी, जिसमे बृजभूषण सिंह, रघुराज प्रताप सिंह जैसे नाम शामिल

न्यायाधीश विनोद दिवाकर ने तल्ख टिप्पणी करते हुए कहा कि उत्तर प्रदेश के सभी 75 जिलों के जिला मजिस्ट्रेटों (DMS), […]

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BHOJSHALA CASE : हाई कोर्ट का बड़ा आदेश विवादित स्थल को मंदिर मानते हुए हिंदुओं को पूजा का अधिकार… क्या करेगा मुस्लिम समाज

जुल्फिकार पठान ने कहा, हाई कोर्ट का फैसला पूरी तरह से पढ़ा नहीं है. इसमें जो त्रुटियां हैं, उसको लेकर

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ALLAHABAD HC : इलाहाबाद हाईकोर्ट की उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली पर तीखी टिप्पणी… हमला हो जाता है, तो उसके बाद की जाने वाली कानूनी कार्रवाई व्यर्थ होगी

एसएसपी द्वारा दाखिल हलफनामे की समीक्षा करते हुए अदालत ने गहरा असंतोष व्यक्त किया और इसे “भ्रामक” करार दिया. कोर्ट

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CRIMINAL CONTEMPT ON ADVOCATE : अदालत के खिलाफ़ सोशल मीडिया पर पोस्ट वकील साहब को पड़ा भारी, क्यों पेश होने का आदेश?

पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि जज ने आरोपियों को बरी करने के लिए विपक्षी वकील के साथ

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ALLAHABAD HIGH COURT : विवाहित पुरुष किसी बालिग महिला के साथ उसकी सहमति से लिव-इन रिलेशनशिप में रहता है, तो यह कानून की नजर में कोई अपराध नहीं

लिव-इन-रिलेशन पर इलाहबाद हाईकोर्ट ने स्पष्ट किया कि जब कोई कानूनी अपराध नहीं बनता, तब सामाजिक धारणाएं और नैतिकता नागरिकों

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SUPREME COURT : क्यों सुप्रीम कोर्ट ने कहा पति की खाना बनाने और कपड़े धोने जैसे कामों में बराबर की भागीदारी

हाईकोर्ट का यह मानना सही है कि खाना न बनाना क्रूरता का आधार नहीं हो सकता. वहीं जस्टिस संदीप मेहता

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ALLAHABAD HIGH COURT : अगर एसपी और डीएम कानून-व्यवस्था बनाए नहीं रख सकते, तो उन्हें इस्तीफा दे देना चाहिए…मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के बाद इलाहाबाद हाईकोर्ट की टिप्पणी

हाई कोर्ट सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य की ड्यूटी है कि वह हर स्थिति में

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ALLAHABAD HC : घर पर नमाज़ के दौरान पुलिस ने उठाया…इलाहबाद हाई कोर्ट ने डीएम एसएसपी को किया तलब

हसीन खान के मुताबिक कागजात मैं पढ़ नहीं सका क्योंकि मैं अनपढ़ हूं. अब कोर्ट ने डीएम और एसपी को

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SUPREME COURT : पीड़िता को जबरदस्ती ले जाना और उसके कपड़े उतारने की कोशिश करना, केवल अपराध की ‘तैयारी’ नहीं बल्कि ‘दुष्कर्म का प्रयास’ है- सुप्रीम कोर्ट

जस्टिस सूर्य कांत ने मध्य प्रदेश राज्य बनाम महेंद्र उर्फ गोलू (2022) के फैसले का हवाला दिया, जिसमें स्पष्ट किया

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