STF के IG अमिताभ यश पैसा लेकर पंजाब के दहशतगर्दों को छोड़ देता है. इस मामले में विद्वान मजिस्ट्रेट ने 12 दिसंबर 2018 को शिकायत का संज्ञान लेते हुए न्यूज़ चैनल के तत्कालीन कार्यकारी संपादक ज्योति कमल, क्राइम रिपोर्टर संतोष शर्मा और एंकर गौरव शुक्ला को तलब (समन) किया था.

LUCKNOW HIGH COURT : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ का बड़ा फैसला News18 चैनल के तीन वरिष्ठ पत्रकारों को राहत देने से इनकार कर दिया है.
क्या था मामला : उत्तर प्रदेश पुलिस के वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी और वर्तमान में एसटीएफ व कानून-व्यवस्था के अतिरिक्त पुलिस महानिदेशक अमिताभ यश द्वारा दायर एक परिवाद से जुड़ा है, इसमें आरोप लगाया गया हैं कि 20 सितंबर 2017 को शाम पंजाब/हरियाणा/हिमाचल प्रदेश चैनल पर एक खबर प्रसारित की गई थी, जिसमें अधिकारी की छवि को धूमिल करने का प्रयास किया गया. खबर में कथित तौर पर दिखाया गया था कि नाभा जेल ब्रेक के मास्टरमाइंड गुरप्रीत सिंह उर्फ गोपी घनश्यामपुरिया को यूपी पुलिस ने गिरफ्तार किया था, लेकिन एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने पैसे लेकर उसे छोड़ दिया.
इसमें कहा गया था STF के IG अमिताभ यश पैसा लेकर पंजाब के दहशतगर्दों को छोड़ देता है. इस मामले में विद्वान मजिस्ट्रेट ने 12 दिसंबर 2018 को शिकायत का संज्ञान लेते हुए न्यूज़ चैनल के तत्कालीन कार्यकारी संपादक ज्योति कमल, क्राइम रिपोर्टर संतोष शर्मा और एंकर गौरव शुक्ला को तलब (समन) किया था. इसी समन आदेश को चुनौती देने के लिए पत्रकारों ने हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाया था.
क्या कहा न्यायालय ने : न्यायालय ने वरिष्ठ आईपीएस अधिकारी अमिताभ यश द्वारा दायर आपराधिक मानहानि मामले में जारी समन आदेश और आपराधिक कार्यवाही को रद्द करने की मांग वाली याचिका को खारिज कर दिया है. न्यायमूर्ति बृज राज सिंह की पीठ ने स्पष्ट किया कि धारा 482 दंड प्रक्रिया संहिता (CrPC) के तहत कार्यवाही के चरण में न्यायालय साक्ष्यों का वजन नहीं कर सकता है और न ही मिनी ट्रायल आयोजित कर सकता है.
मामले को समझते हुए कोर्ट ने कहा कि इस मामले में ट्रायल (विचारण) आवश्यक है. न्यायालय ने सीबीआई बनाम आर्यन सिंह (2023) के मामले में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि हाईकोर्ट के लिए यह उचित नहीं है कि वह आरोपों की विस्तार से जांच करे या जांच के दौरान एकत्र की गई सामग्री का विश्लेषण करे. परिणामस्वरूप, हाईकोर्ट ने माना कि मामले में विचारण आवश्यक है और पत्रकारों द्वारा दायर धारा 482 की याचिका को खारिज कर दिया.


