चार चरणों में होने वाले इस चुनाव में कचहरी परिसर में जहां मतदान स्थल होगा वहां प्रत्याशी का बैनर, पोस्टर आदि नहीं लगेगा. किसी मतदाता को मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रानिक गैजेट जिससे फोटो खींची जा सके के साथ मतदान स्थल पर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी.

UP BAR COUNCIL ELECTION 2025-26 : यूपी बार कौंसिल चुनाव सत्र 2025-26 के चुनाव का बिगुल बज चुका हैं, सभी प्रत्याशी खुद को कौंसिल की सीट तक पहुंचाने की जद्दोजहद में लग चुके हैं. आपको बता दें 25 पदों पर इस बार 333 प्रत्याशी मुकाबले में हैं. सभी प्रत्याशी अपने अपने ग्राउंड्स को लेकर मैदान में उतरने को तैयारी कर चुके हैं. हालांकि की राज्य स्तर के इस चुनाव में मज़बूत दावेदारी पेश करने वाले उम्मीदवार ही अपनी जगह बना पाएंगे.
सचिव की तरफ से जारी विज्ञप्ति : कौंसिल के सचिव राम किशोर शुक्ल की ओर से मिली जानकारी के अनुसार सभी 333 प्रत्याशियों का क्रमांक को निर्वाचन अधिकारी के रूप में न्यायमूर्ति अरविंद कुमार त्रिपाठी तथा पर्यवेक्षक न्यायमूर्ति सुरेन्द्र सिंह के निर्देशन में जारी किया गया. इसकी प्रति कार्यालय के नोटिस बोर्ड पर चस्पा किए जाने के साथ ही, महाधिवक्ता कार्यालय तथा समस्त बार संघों को जिला जज/ जिलाधिकारी के माध्यम से प्रेषित की गई है.
मतदान के चरण : इस दौरान मतदान के समय नियमों को सख़्ती से पालन करना होगा मतदान चार चरणों में 16 से 31 जनवरी 2026 तक होगा. चुनाव के दौरान कचहरी परिसर में जहां मतदान स्थल होगा वहां प्रत्याशी का बैनर, पोस्टर आदि नहीं लगेगा. किसी मतदाता को मोबाइल फोन या अन्य इलेक्ट्रानिक गैजेट जिससे फोटो खींची जा सके के साथ मतदान स्थल पर प्रवेश की अनुमति नहीं होगी. किसी भी प्रकार का विज्ञापन प्रतिबंधित है.
कौन से उम्मीदवार रहेंगे मज़बूत कंडीशंस में : ऐसे में हर वोटर्स के मन में यह सवाल लाज़मी ही रहता हैं कौन से उम्मीदवार मज़बूत या कौन से उम्मीदवार अपनी जगह बनाने वाले हैं. इसके लिए आपको आधिकारिक वेबसाइट और पिछली प्रदर्शन रिपोर्ट देखनी होंगी क्योंकि ‘मजबूत’ उम्मीदवार अनुभव, सक्रिय भागीदारी और वकीलों के बीच समर्थन के आधार पर तय होते हैं, जो आमतौर पर अनुभवी और प्रभावी वकीलों में से होते हैं. चुनाव की घोषणा के बाद, आपको उम्मीदवारों के नाम, अनुभव और उनके चुनावी वादों पर ध्यान देना होगा. ऐसे में ज्यादातर उसी उम्मीदवार को सफल के रूप में माना जाता हैं जो अधिवताओ में अपनी मज़बूर घुसपैठ रखता हो और यह पकड़ राज्य स्तर तक होनी बार कौंसिल का रास्ता साफ करता है.
क्या एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट होगा अहम मुद्दा : ऐसे में कई अधिवताओ से बात के दौरान पता चलता हैं कि वकीलों के कई मुद्दों में से एडवोकेट प्रोटेक्शन एक्ट सबसे अहम रहने वाला हैं, लेकिन इसके अलावा फर्स्ट जनरेशन जूनियर के लिए किसी भी तरह की फाइनेंसियल सिक्योरिटी जैसे मुद्दे भी किसी से छिपे नहीं है और इसी दौरान प्रभाकर मिश्रा, एडवोकेट हाई कोर्ट, लखनऊ से बात दौरान उनका कहना था कि फर्स्ट जनरेशन लॉयर के लिए एक प्रॉपर ड्राफ्टिंग और प्लीडिंग का प्लेटफार्म के साथ तीन साल या पाँच साल की पढ़ाई के दौरान ही अटेंडेंस पर ध्यान देना या इसको बहुत ही सख़्ती के साथ अनुपालन करना चाहिए ख़ास कर प्राइवेट लॉ कॉलेज पर सख़्ती से इसका पालन होना चाहिए जिससे हम नए जनरेशन में अच्छे वकील तैयार कर पाएंगे. इसके अलावा वह कहते है कि जूनियर लॉयर के लिए या जो फर्स्ट जनरेशन लॉयर के लिए प्रॉपर फाइनेंसियल सिक्योरिटी जैसी व्यवस्था होनी भी ज़रूरी है.
क्यों ज़रूरी एडवोकेटस प्रोटेक्शन एक्ट : वकीलों पर अक्सर अपने प्रोफेशन के दौरान सुरक्षा पर सवाल उठते रहते हैं. ऐसे में उनके सरक्षण के लिए भी एक मज़बूत कानून की ज़रुरत अब आ पड़ी हैं. अधिवक्ता संरक्षण अधिनियम अधिवक्ताओं की सुरक्षा के लिए बहुत जरूरी है. यह अधिवक्ताओं को हिंसा, उत्पीड़न और धमकी से बचाता है, जिससे वे अपने कर्तव्यों का प्रभावी ढंग से पालन कर सकते हैं. यह कानून अधिवक्ताओं को सुरक्षित वातावरण प्रदान करता है और उन्हें प्रतिशोध के डर के बिना न्याय करने का अधिकार देता है.



