सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां लंबित सभी अग्रिम और नियमित जमानत याचिकाओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करें साथ ही यह भी उम्मीद जतायी हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई समय सारिणी थोपे जाने का इंतजार करने के बजाय, खुद सुधारात्मक कदम उठाएंगे ताकि उचित समय के भीतर याचिकाओं का निपटारा हो सके.

SUPREME COURT : सुप्रीम कोर्ट ने एक बार फिर जमानत याचिकाओं की पेंडेंसी पर नाराज़गी जतायी हैं. आपको बता दें देश के विभिन्न हाईकोर्ट्स में जमानत और अग्रिम जमानत याचिकाओं के भारी बैकलॉग और सुनवाई में हो रही देरी पर उच्चतम न्यायालय ने कड़ा रुख अपनाया है.
सुनवाई के दौरान अहम टिप्पणी : मामले की सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता के वकील ने आंकड़े पेश करते हुए बताया कि पंजाब एवं हरियाणा हाईकोर्ट में कई जमानत याचिकाएं मई 2025 से लंबित हैं और बिना किसी प्रभावी सुनवाई के बार-बार स्थगित की जा रही हैं. इस स्थिति पर नाराजगी जताते हुए सीजेआई सूर्य कांत ने जोर देकर कहा कि भले ही अदालतों पर काम का भारी बोझ हो, लेकिन किसी व्यक्ति की स्वतंत्रता अन्य विविध मामलों से ऊपर होनी चाहिए।सीजेआई ने टिप्पणी की हम यह देखकर बेहद निराश हैं कि व्यक्तियों की स्वतंत्रता से जुड़ी प्रार्थनाओं पर विचार नहीं किया जा रहा है. सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि हालात नहीं सुधरे, तो वह समयबद्ध सुनवाई सुनिश्चित करने के लिए अनिवार्य दिशानिर्देश जारी करने के लिए बाध्य होगी.
क्या कहती हैं कोर्ट : पीठ ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीशों की प्रशासनिक स्वायत्तता पर भी बात की कोर्ट ने माना कि मुकदमों को सूचीबद्ध करना मुख्य न्यायाधीश का विशेषाधिकार है क्योंकि वे रोस्टर के मास्टर होते हैं. सुप्रीम कोर्ट का यह भी कहना था कि नागरिकों की आजादी अधर में लटकी हो, तो शीर्ष अदालत मूकदर्शक नहीं बनी रह सकती. कोर्ट कहती हैं कि हम इस तथ्य के प्रति सचेत हैं कि लिस्टिंग मुख्य न्यायाधीशों का विशेष अधिकार है. लेकिन लोग जेल में सड़ रहे हैं, जमानत याचिकाओं पर सुनवाई नहीं हो रही है और पूरी अनिश्चितता है कि उन्हें कब अपनी अर्जी का परिणाम पता चलेगा. ऐसे में, कुछ अनिवार्य दिशानिर्देश जारी करना इस अदालत का परम कर्तव्य है. सुप्रीम कोर्ट ने हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार जनरल को निर्देश दिया है कि वे अपने यहां लंबित सभी अग्रिम और नियमित जमानत याचिकाओं का विस्तृत ब्यौरा प्रस्तुत करें साथ ही यह भी उम्मीद जतायी हैं कि सुप्रीम कोर्ट द्वारा कोई समय सारिणी थोपे जाने का इंतजार करने के बजाय, खुद सुधारात्मक कदम उठाएंगे ताकि उचित समय के भीतर याचिकाओं का निपटारा हो सके.



