कमिश्नर ने सुझाव दिया है, उसे ‘सॉफ्ट स्किल्स’ (मृदु कौशल) के प्रशिक्षण की आवश्यकता है. पुलिस कमिश्नर ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी और वकीलों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी.

RAJASTHAN HIGH COURT : राजस्थान हाईकोर्ट ने लिया एक्शन आपको बताते चले जोधपुर के एक पुलिस थाने में थाना अधिकारी द्वारा वकील के साथ की गई बदसलूकी और हाथापाई की घटना पर नाराज़गी व्यक्त की हैं. कड़ा रुख अपनाते हुए कोर्ट ने इस मामले में स्वतः संज्ञान लेते हुए राज्य के प्रत्येक जिले में समन्वय समितियों के तत्काल गठन का निर्देश दिया है. मामले पर कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा कि वकील और पुलिसकर्मी न्याय वितरण प्रणाली के दो अंग हैं और उन्हें आपसी सम्मान और सहयोग के साथ काम करना चाहिए.
क्या था मामला : अधिवक्ता श्री भरत सिंह राठौड़ अपनी पत्नी के साथ एक दुष्कर्म पीड़िता को लेकर पुलिस थाने गए थे, वकीलों ने देखा कि एक व्यक्ति बिना वर्दी के सादे कपड़ों में पीड़िता का बयान दर्ज कर रहा था, जो कि प्रक्रिया के विरुद्ध था. जब श्री राठौड़ ने एसएचओ से इसकी शिकायत की, तो अधिकारी ने वकील के साथ दुर्व्यवहार किया, हाथापाई की और उन्हें एक कमरे में धक्का दे दिया. स्थिति तब और बिगड़ गई जब वकील ने मांग की कि पीड़िता को बार-बार थाने न बुलाया जाए. आरोप है कि एसएचओ ने वकील को रोक कर रखा. उनकी पत्नी, जिन्होंने सही तरीके से बयान दर्ज करने और अपने पति के साथ हो रही बदसलूकी का विरोध किया, उन्हें भी वहां से जाने के लिए कहा गया और एक महिला कांस्टेबल ने उन्हें हटाने की कोशिश की। घटना का एक वीडियो भी कोर्ट को दिखाया गया.
तलब हुए पुलिस कमिश्नर : घटना को गंभीर मानते हुए खंडपीठ ने जोधपुर के पुलिस कमिश्नर श्री ओम प्रकाश, पुलिस उपायुक्त (पश्चिम) और अतिरिक्त पुलिस उपायुक्त को तलब किया. कोर्ट ने नोट किया घटना, जिसका वीडियो वायरल हो गया है, यह दर्शाता है कि संबंधित एसएचओ ने वास्तव में दुर्व्यवहार किया है और जैसा कि कमिश्नर ने सुझाव दिया है, उसे ‘सॉफ्ट स्किल्स’ (मृदु कौशल) के प्रशिक्षण की आवश्यकता है. पुलिस कमिश्नर ने कोर्ट को आश्वासन दिया कि मामले की जांच की जाएगी और वकीलों के साथ दुर्व्यवहार करने वाले जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ विभागीय कार्यवाही शुरू की जाएगी.
क्या कहा कोर्ट ने : इस घटना को बेहद दुर्भाग्यपूर्ण बताया और न्याय प्रशासन के दो अंगों के बीच समन्वय की कमी पर चिंता व्यक्त की. कोर्ट ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा हमारा मानना है कि जहां तक अधिवक्ताओं और पुलिसकर्मियों का संबंध है, वे दोनों एक ही न्याय वितरण प्रणाली के दो अंग हैं और उन्हें एक-दूसरे के साथ मिलकर कार्य करना चाहिए. जहां पुलिस को कठिन परिस्थितियों में काम करना पड़ता है और कभी-कभी आरोपियों के साथ सख्ती से पेश आना पड़ता है, वहीं वकीलों के साथ व्यवहार करते समय उनसे ऐसी अपेक्षा नहीं की जा सकती. इसी के साथ कोर्ट ने आगे कहा कि वकीलों से भी अपेक्षा की जाती है कि वे पुलिसकर्मियों के साथ विनम्रता और शिष्टाचार से पेश आएं. व्यवस्था में सुधार की आवश्यकता पर जोर देते हुए, कोर्ट ने कहा कि पुलिस अधिकारियों को “गहन सॉफ्ट स्किल ट्रेनिंग दी जानी चाहिए.
कोर्ट निर्देश देते हुए कहती हैं कि प्रत्येक जिले में समन्वय समिति का नए सिरे से गठन किया जाएगा और इसका विवरण अगली सुनवाई तक कोर्ट को सूचित किया जाना चाहिए. मामले की अगली सुनवाई 8 दिसंबर, 2025 को निर्धारित की गई है.



