सुप्रीम कोर्ट ने संजय प्रसाद को याचिका दायर करने की अनुमति देते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया. जिसे एक बड़ी राहत की तरह देखा जा रहा था.

SANJAY PRASAD : आज कल संजय प्रसाद नाम काफी चर्चाओं में रहा हैं, वह उत्तर प्रदेश सरकार में तैनात 1995 बैच के एक वरिष्ठ आईएएस (IAS) अधिकारी हैं. वे वर्तमान में अपर मुख्य सचिव (ACS), गृह, ACS CM एवं सूचना व अन्य के पद पर कार्य कर रहे हैं. मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के सबसे करीबी और भरोसेमंद नौकरशाहों में से एक माने जाते हैं. ऐसा भी कहा जाता हैं कि मौजूदा समय में वह सबसे ताकतवर अधिकारी में से एक हैं.
क्यों चर्चा में IAS संजय प्रसाद : मामला जून 2025 में लापता हुई एक नाबालिग लड़की की बरामदगी से जुड़ी एक हैबियस कार्पस (बंदी प्रत्यक्षीकरण) याचिका से शुरू हुआ था. इलाहाबाद हाईकोर्ट के एकल जज जस्टिस विनोद दिवाकर की पीठ ने याचिका का निपटारा करते हुए यह नोट किया कि लड़की को बरामद कर उसके माता-पिता को सौंप दिया गया है.
क्या था इलाहबाद हाई कोर्ट का आदेश : कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के गृह विभाग के कामकाज और वरिष्ठ अधिकारियों के आचरण को लेकर गंभीर टिप्पणियां की थी. इसने विशेष रूप से 1995 बैच के आईएएस अधिकारी संजय प्रसाद के आचरण पर सवाल उठाए और हाईकोर्ट के रजिस्ट्रार (अनुपालन) को निर्देश दिया कि वे इस फैसले की एक प्रमाणित प्रति कार्मिक और प्रशिक्षण विभाग के सचिव को भेजें. कोर्ट का कहना था कि कैबिनेट की नियुक्ति समिति द्वारा भविष्य में अधिकारी की योग्यता के मूल्यांकन के दौरान इसे रिकार्ड में रखा जाए. इसी के साथ संजय प्रसाद पर चर्चाओं का दौर शुरू हो चुका था.
आपको बताते चलें कि इलाहाबाद हाईकोर्ट के तीन जून के फैसले को चुनौती देते हुए संजय प्रसाद ने सुप्रीम कोर्ट में एक विशेष अनुमति याचिका दायर की थी. सुप्रीम कोर्ट ने संजय प्रसाद को याचिका दायर करने की अनुमति देते हुए प्रतिवादियों को नोटिस जारी किया. जिसे एक बड़ी राहत की तरह देखा जा रहा था.
सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस मिश्रा की अगुवाई वाली पीठ ने अपने आदेश में स्पष्ट किया, “हाईकोर्ट द्वारा विवादित आदेश के तहत जारी किए गए निर्देशों पर रोक रहेगी. इस अंतरिम रोक के बाद संजय प्रसाद को फिलहाल बड़ी प्रशासनिक और कानूनी राहत मिल गई है. सुप्रीम कोर्ट ने इलाहाबाद हाईकोर्ट के उस फैसले पर अंतरिम रोक लगा दी है, जिसमें संजय प्रसाद के खिलाफ प्रतिकूल टिप्पणियां की गई थीं. इसी को लेकर संजय प्रसाद के लिए एक बड़ी कानूनी जीत बताई जा रही हैं.


