न्यूज़क्लिक ने दलील दी थी कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य पत्रकारों समेत विभिन्न लोगों में डर का माहौल पैदा करना है ताकि वे अभिव्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने से हिचकें.

DELHI : हालही में वरिष्ठ पत्रकार प्रबीर पुरकायस्थ के मामले बड़ा फैसला सुनाया, जिसमे स्वतंत्र पत्रकारिता पर गहरी टिप्पणी की हैं. इस चर्चित मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने समाचार पोर्टल न्यूज़क्लिक और उसके संस्थापक और प्रधान संपादक प्रबीर पुरकायस्थ के ख़िलाफ़ दिल्ली पुलिस की एफ़आईआर और प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की मनी लॉन्ड्रिंग जाँच को रद्द कर दिया है.
अपनी टिप्पणी में कहता हैं हाई कोर्ट : गंभीर प्रकृति के मामले में दिल्ली हाई कोर्ट ने कहा कि यह कार्रवाई स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के ख़िलाफ़ शक्तियों के दुरुपयोग का मामला है. इस मामले पर न्यायमूर्ति नीना बंसल कृष्णा की कोर्ट सुनवाई कर रही थी. 29 मई को दिए इस फैसले में उनकी कोर्ट कहती हैं कि आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की एफ़आईआर और उसके आधार पर शुरू की गई पीएमएलए की कार्रवाई को रद्द कर दिया. अदालत ने कहा, मौजूदा कार्यवाही न केवल दुर्भावनापूर्ण है, बल्कि याचिकाकर्ताओं की स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता के ख़िलाफ़ शक्तियों का मनमाना हमला और दुरुपयोग भी है.
बड़े वकीलों ने दिए तर्क : मामले पर बचाव पक्ष की ओर से वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल और डी कृष्णन ने दलील रखी जबकि जांच एजेंसियों की ओर से एडिशनल सॉलिसिटर जनरल एसवी राजू अदालत में पेश हुए थे. हालांकी प्रबीर पुरकायस्थ को मई 2024 में सुप्रीम कोर्ट के आदेश पर रिहा किया गया था. उन्हें अक्तूबर 2023 में चीन से अवैध फ़ंडिंग लेने के आरोपों में यूएपीए के तहत गिरफ़्तार किया गया था. हालांकी न्यूज़क्लिक ने अपने तर्क में कहा कि एफ़आईआर, ईसीआईआर और उससे जुड़ी जांच राष्ट्रीय महत्व के मुद्दों पर स्वतंत्र और निष्पक्ष पत्रकारिता को दबाने की कोशिश है. न्यूज़क्लिक ने दलील दी थी कि इन कार्रवाइयों का उद्देश्य पत्रकारों समेत विभिन्न लोगों में डर का माहौल पैदा करना है ताकि वे अभिव्यक्ति की संवैधानिक स्वतंत्रता का इस्तेमाल करने से हिचकें. यह भी कहा गया कि भारतीय रिजर्व बैंक (आरबीआई) को भी किसी तरह की अनियमितता नहीं मिली थी. ईडी ने आरोपित पक्षों को ईसीआईआर की प्रति भी उपलब्ध नहीं कराई थी.
क्या था मामला : आपको बता दें 26 अगस्त 2020 को दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा ने भारतीय दंड संहिता की धारा 406, 420 और 120बी (आपराधिक साज़िश) के तहत एफ़आईआर दर्ज की थी. इस एफ़आईआर में आरोप लगाया गया था कि न्यूज़क्लिक की मालिक कंपनी पीपीके न्यूज़क्लिक स्टूडियो प्राइवेट लिमिलेटड को 2018-19 के दौरान अमेरिकी कंपनी वर्ल्ड मीडिया होल्डिंग्स एलएलसी से प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (एफ़डीआई) मिला था.
क्या रहा आर्डर : मामले पर अदालत ने 2020 में दिल्ली पुलिस की आर्थिक अपराध शाखा (ईओडब्ल्यू) की ओर से दर्ज एफ़आईआर को रद्द करते हुए कहा, इस एफ़आईआर को जारी रखना क़ानून की प्रक्रिया का गंभीर दुरुपयोग है और इसे रद्द किया जाता है. चूंकि मूल आपराधिक मामला ही रद्द कर दिया गया, इसलिए हाई कोर्ट ने ईडी की कार्रवाई भी समाप्त कर दी. अदालत ने कहा कि ईडी ने करीब डेढ़ साल तक व्यापक जांच की, लेकिन अब तक ऐसा कोई भी आपत्तिजनक तथ्य सामने नहीं आया जो मनी लॉन्ड्रिंग निवारण अधिनियम (पीएमएलए) की धारा 4 के तहत अपराध होने का संकेत भी देता हो.


