17 जुलाई 2026 को जारी हुऐ इस सर्कुलर में BCI कहती हैं कि अदालत की कार्यवाही के चुनिंदा हिस्सों को काट-छांटकर सनसनीखेज या उपहासपूर्ण तरीके से प्रसारित करना न्यायपालिका और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है.

BCI : बार काउंसिल ऑफ इंडिया-BCI ने वकीलों, कानून के छात्रों, इंटर्न, लॉ फर्मों और सोशल मीडिया पर कानूनी सामग्री बनाने वालों के लिए डिजिटल आचरण को लेकर 37 पन्नों का विस्तृत सर्कुलर जारी किया है. आपको बता दे इसमें कोर्ट परिसर में रील और वीडियो बनाने, अदालत की कार्यवाही के संपादित क्लिप साझा करने, भ्रामक कानूनी दावे करने, पेशेवर प्रचार, AI से तैयार डीपफेक सामग्री और फर्जी कानूनी कंटेंट के प्रसार पर कड़ी आपत्ति जताते हुए पूरे देश में अनुपालन व्यवस्था लागू करने के निर्देश दिए गए हैं.
क्या कहा गया हैं सर्कुलर में : मामले को संगीन मानते हुऐ सर्कुलर में कहा गया है कि हाल के समय में कुछ अधिवक्ता, इंटर्न, छात्र और सोशल मीडिया उपयोगकर्ता कोर्ट परिसर, न्यायिक सुनवाई, चैंबर और लाइव-स्ट्रीम की गई अदालत की कार्यवाही के वीडियो, रील, मीम, छोटे क्लिप और प्रचारात्मक पोस्ट बना रहे हैं. 17 जुलाई 2026 को जारी हुऐ इस सर्कुलर में BCI कहती हैं कि अदालत की कार्यवाही के चुनिंदा हिस्सों को काट-छांटकर सनसनीखेज या उपहासपूर्ण तरीके से प्रसारित करना न्यायपालिका और न्याय प्रणाली में जनता के विश्वास को कमजोर कर सकता है.
BCI की वकीलों को सलाह : कोर्ट परिसर, कोर्ट रूम, बार रूम, चैंबर या न्यायिक भवनों में रील, वीडियो या प्रचार सामग्री न बनाएं.
अदालत की भौतिक, वर्चुअल या हाइब्रिड कार्यवाही की रिकॉर्डिंग बिना अनुमति न करें.
लाइव स्ट्रीम कार्यवाही को संपादित कर संगीत, कैप्शन, वॉयसओवर या टिप्पणी के साथ इस तरह प्रसारित न करें जिससे न्यायाधीशों, वकीलों या पक्षकारों का उपहास हो.
कोर्ट भवन, जजों के नाम, कोर्ट के दस्तावेज, रोब, बैंड, ब्रीफ या चैंबर को सोशल मीडिया ब्रांडिंग के लिए उपयोग न करें.
प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष विज्ञापन या मुवक्किल जुटाने वाली सामग्री प्रकाशित न करें.
मुवक्किलों या मामलों से जुड़ी गोपनीय जानकारी साझा न करें.
लंबित मामलों पर ऐसी टिप्पणी न करें जिससे न्यायिक प्रक्रिया प्रभावित हो.
पेशेवर प्रतिबंधों से बचने के लिए फर्जी या गुमनाम सोशल मीडिया अकाउंट का इस्तेमाल न करें.
जो अधिवक्ता नहीं हैं वो कानूनी सलाहकार बताकर पेश नहीं कर सकता : BCI स्पष्ट रूप से कहता हैं कि जो व्यक्ति बार काउंसिल में नामांकित अधिवक्ता नहीं है, वह स्वयं को अधिवक्ता, प्रैक्टिसिंग लॉयर या कानूनी सलाहकार बताकर पेश नहीं कर सकता. कानून के छात्र, इंटर्न और शोधार्थी कानूनी जागरूकता से जुड़े कार्यक्रमों में भाग ले सकते हैं, लेकिन वे स्वयं को पेशेवर कानूनी सेवाएं देने वाला अधिवक्ता नहीं बता सकते.
सर्कुलर के अनुसार, सही कानूनी जानकारी, न्यायालय के निर्णयों पर शैक्षणिक चर्चा, न्यूट्रल केस लॉ अपडेट, संवैधानिक जागरूकता, सार्वजनिक कानूनी शिक्षा और संक्षिप्त वीडियो या रील के माध्यम से कानूनी जानकारी साझा की जा सकती है, बशर्ते वह तथ्यात्मक, गैर-प्रचारात्मक, गैर-सनसनीखेज हो और कानूनी परिणामों की गारंटी न देती हो. ऐसी सामग्री में संबंधित कानून या निर्णय का उल्लेख और आवश्यक होने पर उचित डिस्क्लेमर भी होना चाहिए.


