अदालत ने बेहद सख्त लहजे में टिप्पणी की कि जब हाईकोर्ट द्वारा सीधे मॉनिटर किए जा रहे किसी मामले को प्रशासन इस कदर लापरवाही से संभाल रहा है.

HIGH COURT LUCKNOW : इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ पीठ ने संपत्ति हड़पने के एक मामले में पुलिस जांच की बेहद धीमी प्रगति और अदालती आदेशों की अनदेखी पर बेहद कड़ा रुख अपनाते हुए नाराज़गी जतायी हैं.
संजय प्रसाद को जारी नोटिस : मामले पर नाराज़गी जताते हुए हाईकोर्ट ने उत्तर प्रदेश के अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद को कारण बताओ नोटिस जारी कर पूछा है कि न्यायिक निर्देशों की अवहेलना करने के लिए उनके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की सिफारिश क्यों न की जाए.
जस्टिस अब्दुल मोईन की बेंच ने क्या कहा : जस्टिस अब्दुल मोइन और जस्टिस प्रमोद कुमार श्रीवास्तव की पीठ ने इस मामले में अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद और राज्य के मुख्य सचिव दोनों को व्यक्तिगत हलफनामा दाखिल करने का निर्देश दिया है. अदालत ने कहा हैं कि अधिकारियों ने समय पर हलफनामा दाखिल नहीं किया, तो उन्हें आगामी 15 जुलाई को व्यक्तिगत रूप से कोर्ट के समक्ष पेश होना होगा.
क्या था मामला : गायत्री देवी द्वारा दायर एक आपराधिक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान सामने आया. याचिकाकर्ता ने लखनऊ के पीजीआई थाने में 9 जनवरी 2025 को दर्ज कराई गई एक एफआईआर की निष्पक्ष और प्रभावी जांच की मांग की है. दर्ज मामले में अमानत में खयानत, धोखाधड़ी और बेईमानी से संपत्ति हड़पने के गंभीर आरोप लगाए गए हैं. पीठ ने इस बात पर भी चिंता जताई कि मामले के चार नामजद आरोपियों में से अब तक किसी की भी गिरफ्तारी नहीं हो सकी है, जबकि कोर्ट ने 13 अप्रैल और 29 अप्रैल के अपने पिछले आदेशों में भी इस मुद्दे को गंभीरता से उठाया था.
मामले की गंभीरता को देखते हुए कोर्ट कहती हैं कि अतिरिक्त मुख्य सचिव (गृह) संजय प्रसाद द्वारा 20 मई को दाखिल किए गए व्यक्तिगत हलफनामे में कई विसंगतियां पाईं. पीठ ने कहा कि गृह सचिव का आचरण प्रथम दृष्टया यह दर्शाता है कि उन्हें अदालती आदेशों की कोई परवाह नहीं है. अदालत ने बेहद सख्त लहजे में टिप्पणी की कि जब हाईकोर्ट द्वारा सीधे मॉनिटर किए जा रहे किसी मामले को प्रशासन इस कदर लापरवाही से संभाल रहा है, तो राज्य में चल रहीं उन तमाम सामान्य पुलिस जांचों की स्थिति क्या होगी जिनकी कोई अदालती निगरानी नहीं हो रही है, इसका आसानी से अंदाजा लगाया जा सकता है.


