हाईकोर्ट का यह मानना सही है कि खाना न बनाना क्रूरता का आधार नहीं हो सकता. वहीं जस्टिस संदीप मेहता ने कड़े शब्दों में कहा आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं, आप एक जीवनसंगिनी से शादी कर रहे हैं.

SUPREME COURT : वैवाहिक सम्बन्धो को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने की बड़ी टिप्पणी कोर्ट ने कहा कि पति को खाना बनाने, सफाई और कपड़े धोने जैसे घरेलू कामों में बराबर की भागीदारी करनी चाहिए.
क्या था मामला : कर्नाटक हाईकोर्ट ने इससे पहले ट्रायल कोर्ट के उस फैसले को पलट दिया था, जिसमें पति को तलाक की मंजूरी दी गई थी. सुनवाई के दौरान पति के वकील ने दलील दी कि मई 2017 में हुई यह शादी अब पूरी तरह टूट चुकी है और कपल 2019 से ही अलग रह रहा है. जब बेंच ने पति द्वारा लगाए गए क्रूरता के आरोपों की गहराई पूछी, तो वकील ने बताया कि पत्नी का व्यवहार ठीक नहीं था और वह खाना नहीं बनाती थी.
जस्टिस विक्रम नाथ ने टिप्पणी की आपको इन सभी कामों में बराबर की भागीदारी करनी होगी चाहे वह खाना बनाना हो, सफाई हो या धुलाई. आज का समय बदल चुका है. उन्होंने आगे कहा कि हाईकोर्ट का यह मानना सही है कि खाना न बनाना क्रूरता का आधार नहीं हो सकता. वहीं जस्टिस संदीप मेहता ने कड़े शब्दों में कहा आप किसी नौकरानी से शादी नहीं कर रहे हैं, आप एक जीवनसंगिनी से शादी कर रहे हैं.
पति और पत्नी दोनों ही सरकारी स्कूल में शिक्षक के पद पर कार्यरत हैं. दोनों के कामकाजी होने के बावजूद, पति ने ट्रायल कोर्ट के उस आदेश को बहाल रखने की मांग की थी, जिसने पत्नी द्वारा घरेलू काम न करने को आधार मानकर तलाक मंजूर किया था।कर्नाटक हाईकोर्ट ने ट्रायल कोर्ट के फैसले को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि वैवाहिक कानून के तहत ये आधार “क्रूरता” की श्रेणी में नहीं आते. सुप्रीम कोर्ट की ताजा टिप्पणियां भी इसी रुख का समर्थन करती नजर आईं कि आधुनिक विवाह में घरेलू जिम्मेदारियां दोनों का साझा कर्तव्य हैं.
हालांकी अब कोर्ट ने कहा हैं कि दोनों पक्षों को व्यक्तिगत रूप से बुलाएं. हम उनसे बात करना चाहेंगे. सुनवाई 27 अप्रैल.



