हाई कोर्ट सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य की ड्यूटी है कि वह हर स्थिति में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करें.

ALLAHABAD HIGH COURT : जिला प्रशासन के संभल की मस्जिद में नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करने के खिलाफ इलाहाबाद हाईकोर्ट ने प्रशासन के आदेश को किया ख़ारिज
क्या कहा कोर्ट ने : सुनवाई के दौरान कोर्ट ने कहा कि अगर एसपी और डीएम कानून-व्यवस्था बनाए नहीं रख सकते, तो उन्हें या तो इस्तीफा दे देना चाहिए या ट्रांसफर मांग लेना चाहिए. कोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए कहती हैं कि एसपी और डीएम को लगता है कि कानून-व्यवस्था की स्थिति पैदा हो सकती है. जिसकी वजह से वे जगह के अंदर नमाज पढ़ने वालों की संख्या सीमित करना चाहते है या अगर उन्हें लगता है कि वे कानून का राज लागू करने में काबिल नहीं हैं तो उन्हें या तो अपने पद से इस्तीफा दे देना चाहिए या संभल से बाहर ट्रांसफर मांग लेना चाहिए.
हाई कोर्ट सुनवाई के दौरान टिप्पणी करते हुए कहा कि यह राज्य की ड्यूटी है कि वह हर स्थिति में कानून व्यवस्था सुनिश्चित करें. हाई कोर्ट ने कहा कि अदालत पहले ही एक मामले में कह चुकी है कि प्राइवेट प्रॉपर्टी पर पूजा या इबादत के लिए पूर्व अनुमति लेने की सरकार से कोई जरूरत नहीं है. फिलहाल के लिए अगली सुनवाई 16 मार्च को फ्रेश केस के तौर पर होगी.
क्या था मामला : यह पूरा मामला संभल के हयात नगर थाना क्षेत्र के एक गांव का है, जहां करीब 450 वर्ग फीट क्षेत्रफल में बनी घोसिया नाम की मस्जिद है. प्रशासन के मुताबिक जमीन का गट नंबर 291 है. डाक्यूमेंट्स में जमीन मोहन सिंह और भूराज सिह पुत्र सुखी सिंह के नाम पर है, इलाके में लगभग 2700 से ज्यादा लोग रहते हैं. याचिकाकर्ता मुनाजिर खान के अनुसार, पिछले साल फरवरी में हयातनगर थाने से पुलिसकर्मी गांव पहुंचे थे और उन्होंने निर्देश दिया कि मस्जिद में एक समय में केवल 20 लोग ही नमाज़ पढ़ सकते हैं, जबकि एक बार में 5–6 लोगों को ही नमाज़ अदा करने की अनुमति दी जाएगी. आदेश के खिलाफ मुनाजिर खान ने 18 जनवरी 2026 को इलाहाबाद हाई कोर्ट में याचिका दायर की थी. हालांकी की प्रशासन के आदेश को अब रद्द कर दिया गया हैं.
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