बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए जिसमे साफ तौर पर कहा गया हैं कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद कैसे पावर दी जा सकती हैं.

HIGH COURT LUCKNOW : यूपी पंचायत चुनाव को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने एक बड़ा कदम उठाया है. हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने उत्तर प्रदेश सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट पेश करने का निर्देश दिया है और साथ ही यह भी कहा है कि प्रदेश में पंचायत चुनाव कराने की संभावित समय-सीमा और तैयारी क्या है.
अवकाशकालीन पीठ का फैसला : न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति ए. के. चौधरी की अवकाशकालीन पीठ ने यह निर्देश बुधवार को एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए जारी किए जिसमे साफ तौर पर कहा गया हैं कि कार्यकाल समाप्त होने के बाद कैसे पावर दी जा सकती हैं. जिसमे ग्राम प्रधानों को ही प्रशासक बना दिया गया हैं. जबकि इन ग्राम प्रधानों का कार्यकाल 26 मई को समाप्त हो गया था. इस मामले में अब अगली सुनवाई 10 जुलाई को होगी.
मामले पर याचिका करने वाले का कहना हैं कि उत्तर प्रदेश पंचायत राज अधिनियम की धारा 12 के मुताबिक, ग्राम प्रधान का कार्यकाल शपथ लेने की तारीख से केवल पांच साल के लिए ही सीमित होता है. चुनाव समय पर न कराकर और फिर निवर्तमान प्रधानों को ही प्रशासक नियुक्त करके सरकार ने एक तरह से उनके कार्यकाल को अनिश्चितकाल के लिए बढ़ा दिया है, जो पूरी तरह से गैर-कानूनी है. याचिकाकर्ता का कहना हैं कि सहायक विकास अधिकारी (पंचायत) या किसी अन्य सरकारी अधिकारी को प्रशासक बनाया जा सकता हैं.
क्या कहा कोर्ट ने : हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को पिछड़ा वर्ग आयोग की रिपोर्ट रिकॉर्ड पर रखने का निर्देश दिया. इसके साथ ही राज्य निर्वाचन आयोग को आदेश दिया कि वह पंचायत चुनाव कराने की वर्तमान स्थिति और संभावित कार्यक्रम की जानकारी कोर्ट को सौंपे.



