अब 7 नवंबर को अगली सुनवाई में अदालत लंबित आवेदनों पर दाखिल जवाबों और लिखित बयानों पर विचार करेगी, जिसके बाद इस लंबे समय से चल रहे विवाद में आगे की कानूनी कार्यवाही का मार्ग प्रशस्त होगा.

ALLAHABAD HC : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने गुरुवार को कृष्ण जन्मभूमि-शाही ईदगाह मस्जिद विवाद की गुरुवार को हुई सुनवाई के दौरान न्यायमूर्ति सक्सेना ने दस्तावेजों का सत्यापन किया और पक्षकारों के वकीलों को निर्देश दिया कि वे लंबित आवेदनों पर अपना जवाब दाखिल करें. अब 7 नवंबर को अगली सुनवाई में अदालत लंबित आवेदनों पर दाखिल जवाबों और लिखित बयानों पर विचार करेगी, जिसके बाद इस लंबे समय से चल रहे विवाद में आगे की कानूनी कार्यवाही का मार्ग प्रशस्त होगा.
क्या हैं विवाद : विवाद मथुरा स्थित शाही ईदगाह मस्जिद को लेकर है, जो कृष्ण जन्मभूमि मंदिर परिसर के पास स्थित है. हिंदू पक्ष का आरोप है कि मुगल बादशाह औरंगज़ेब के शासनकाल में भगवान कृष्ण के जन्मस्थान पर बने मंदिर को तोड़कर इस मस्जिद का निर्माण किया गया. हिंदू पक्ष ने इस विवाद से जुड़ी 18 वाद दाखिल किए हैं, जिनमें शाही ईदगाह संरचना को “हटाने” के बाद भूमि पर कब्ज़ा देने, मंदिर को पुनर्स्थापित करने और स्थायी निषेधाज्ञा जारी करने की मांग की गई है.
क्या हैं प्लेस ऑफ वर्शिप एक्ट :जिसका पूरा नाम ‘पूजा स्थल (विशेष प्रावधान) अधिनियम, 1991’ है, एक ऐसा कानून है जो भारत में धार्मिक स्थलों के धार्मिक स्वरूप को 15 अगस्त, 1947 की स्थिति के अनुसार बनाए रखने के लिए बनाया गया था. इस अधिनियम का मुख्य उद्देश्य यह था कि किसी भी पूजा स्थल को किसी अन्य धर्म के पूजा स्थल में नहीं बदला जा सकता, जिसमें अयोध्या के राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद विवाद को एक अपवाद के रूप में रखा गया था. इस कानून के उल्लंघन पर तीन साल तक की जेल और जुर्माना हो सकता है.


