एसएसपी द्वारा दाखिल हलफनामे की समीक्षा करते हुए अदालत ने गहरा असंतोष व्यक्त किया और इसे “भ्रामक” करार दिया. कोर्ट ने पाया कि पुलिस का हलफनामा केवल जमीन विवाद के मूल कारणों और बीएनएसएस (BNSS) की निवारक धाराओं (170, 126, 135) के तहत की गई कार्रवाई तक सीमित था.

ALLAHABAD HC : इलाहाबाद हाईकोर्ट ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश पुलिस की कार्यप्रणाली तीखी टिप्पणी की है.
मानवीय जीवन को लेकर इलाहाबाद हाई कोर्ट की टिप्पणी : इलाहबाद हाई कोर्ट ने कहा कि राज्य की प्राथमिक जिम्मेदारी किसी अनहोनी के बाद अपराधियों को सजा देना मात्र नहीं, बल्कि मानवीय जीवन की रक्षा करना है. जस्टिस जे जे मुनीर और जस्टिस तरुण सक्सेना की पीठ ने एक मामले की सुनवाई के दौरान कहा कि जीवन की रक्षा को लेकर कानून-व्यवस्था की एजेंसियों की संवेदनशीलता “हमेशा से कम रही है और आज भी वैसी ही बनी हुई है.”
क्या था याचिका में : बदायूं के एक रिट याचिका पर सुनवाई के दौरान याचिकाकर्ता ने अदालत को बताया कि एक पारिवारिक भूमि विवाद के कारण उसे पांच लोगों से अपनी जान का “गंभीर” खतरा है. जिसमे आरोप था कि स्थानीय अधिकारियों ने उसकी सुरक्षा की गुहार पर कोई ठोस ध्यान नहीं दिया, जिसके बाद उसे सुरक्षा और एफआईआर दर्ज कराने के लिए हाईकोर्ट की शरण लेनी पड़ी. 6 अप्रैल को कोर्ट ने बदायूं की वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक (SSP) को व्यक्तिगत हलफनामा दायर कर याचिकाकर्ता के खतरे के आकलन और सुरक्षा उपायों की जानकारी देने का निर्देश दिया था. 4 मई को एसएसपी द्वारा दाखिल हलफनामे की समीक्षा करते हुए अदालत ने गहरा असंतोष व्यक्त किया और इसे “भ्रामक” करार दिया. कोर्ट ने पाया कि पुलिस का हलफनामा केवल जमीन विवाद के मूल कारणों और बीएनएसएस (BNSS) की निवारक धाराओं (170, 126, 135) के तहत की गई कार्रवाई तक सीमित था. इसी बात को लेकर बेंच ने नाराजगी जताते हुए कहा कि ऐसा प्रतीत होता है जैसे जीवन-मरण के इस गंभीर मामले की समझ को किसी दरोगा के विवेक पर छोड़ दिया गया है.
कोर्ट मामले की गंभीरता को देखते हुए कहती हैं कि कि केवल बीट कांस्टेबलों को गश्त का निर्देश देना किसी व्यक्ति की जान के विशिष्ट खतरे को कम करने के लिए पर्याप्त नहीं है. अदालत ने सामान्य शांति व्यवस्था बनाए रखने और किसी व्यक्ति की जान को खतरे के बीच एक स्पष्ट अंतर रेखा खींची. न्यायाधीशों ने तर्क दिया कि यदि याचिकाकर्ता पर हमला हो जाता है, तो उसके बाद की जाने वाली कानूनी कार्रवाई व्यर्थ होगी. हाईकोर्ट ने उन्हें एक नया हलफनामा दाखिल करने का आदेश दिया. अगली सुनवाई अब 13 मई को निर्धारित.



