लंदन में अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस से पहले ही मिल चुके थे. 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान की पार्टी जीत दर्ज कर चुकी है. बताया यह भी गया हैं, संसदीय सीट से बड़े अंतर से जीत दर्ज की है. बोगुरा उनके परिवार का पुश्तैनी गढ़ है, जबकि ढाका-17 सीट देश की राजधानी का दिल मानी जाती है.

BANGLADESH UPDATE : बांग्लादेश की राजनीति में अब चर्चा बढ़चढ़ कर तारिक रहमान की होने लगी हैं. इन्ही के ही नेतृत्व में बांग्लादेश नेशनलिस्ट पार्टी (BNP) ने चुनाव में बंपर जीत दर्ज की है. बांग्लादेश देश के एक प्रभावशाली की भूमिका में दिखने वाले तारिक रहमान को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने जीत की बधाई दी है. तारिक रहमान केवल उत्तराधिकारी भर नहीं हैं, मौजूदा दौर में देश के सबसे शक्तिशाली नेता के तौर उभरे हैं.
शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद आये पिक्चर में : साल 2024 में शेख हसीना की सरकार गिरने के बाद से ही 2026 की शुरुआत तक ज्यादातर बड़े मामलों में तारिक रहमान को बरी कर दिया गया. शेख हसीना की सत्ता से बेदखल होने के बाद तारिक रहमान ने नई राजनीतिक जमीन तैयार की और अतंरिम सरकार बनने और कानूनी अड़चने हटने के बाद दिसंबर 2025 में तारिक ढाका वापस लौट आए. मीडिया रिपोर्ट्स की माने तो वह लंदन में अंतरिम सरकार के प्रमुख मुहम्मद यूनुस से पहले ही मिल चुके थे. 17 साल बाद बांग्लादेश लौटे तारिक रहमान की पार्टी जीत दर्ज कर चुकी है. बताया यह भी गया हैं, संसदीय सीट से बड़े अंतर से जीत दर्ज की है. बोगुरा उनके परिवार का पुश्तैनी गढ़ है, जबकि ढाका-17 सीट देश की राजधानी का दिल मानी जाती है.
कौन है तारिक रहमान : तारिक रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति जिया उर रहमान और पहली महिला प्रधानमंत्री खालिदा जिया के बड़े बेटे हैं. 1967 में जन्मे रहमान की राजनीतिक पहचान परिवार के राजनीतिक रसूख को लेकर होती है. खालिदा जिया जब 2001 से 2006 तक बांग्लादेश में दूसरी बार प्रधानमंत्री रहीं तब एक प्रमुख संगठनात्मक रणनीतिकार के तौर पर तारिक रहमान ने पर्दे के पीछे से बखूबी मोर्चा संभाला. हालांकि इस दौरान उन्होंने कोई औपचारिक तौर पर कोई सरकारी पद नहीं संभाला, फिर भी उन्हें पार्टी के सबसे प्रभावशाली व्यक्तियों में से एक माना जाता था. पार्टी पर पकड़ मजबूत करने के बाद वह बीएनपी के कार्यवाहक अध्यक्ष बन गए. विदेश में रहते हुए भी पार्टी पर उन्होंने कंट्रोल बनाए रखा.
2008 में शेख हसीना के प्रधानमंत्री बनने पर छोड़ा देश : 2008 में जब आम चुनाव हुए और अवामी लीग की जीत के साथ शेख हसीना प्रधानमंत्री बनीं तो रहमान ने व्यक्तिगत सुरक्षा और बीएनपी द्वारा प्रायोजित राजनीतिक उत्पीड़न के आरोपों का हवाला देते हुए बांग्लादेश छोड़ दिया और लंदन में बस गए. विदेश में रहने के बाद वह बांग्लादेश की राजनीति में भाग लेते रहे. हालांकि की यह भी बताया जाता हैं कि अवामी लीग के शासनकाल में तारिक रहमान पर करप्शन से लेकर मनी लॉन्ड्रिंग तक कई गंभीर आरोप लगे. पिता जिया-उर-रहमान बीएनपी के संस्थापक और पूर्व राष्ट्रपति थे. जबकि उनकी मां खालिदा जिया 3 बार देश की प्रधानमंत्री रहीं और अब बेटे ने बांग्लादेश की राजनीति में एक मज़बूत दावेदारी पेश कर दी हैं.



