डॉ. रॉय नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक मजबूत संदेश दे रहे हैं. पत्रकारिता सिर्फ स्टूडियो या बड़े सेटअप तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत तक पहुंचना ही इसकी असली ताकत है. 70 की उम्र पार करने के बावजूद उनका यह जज़्बा यह साबित करता है कि सच्चा पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता.

PRANNOY ROY : अपने बड़े बड़े मीडिया जर्नीलिस्ट का नाम सुना होगा, लेकिन शायद बहुत कम लोग डॉ प्रणय राय को जानते होंगे. जी हाँ यह वहीं वरिष्ठ मीडिया के हस्ती है, जो NDTV के फाउंडिंग मेंबर मे से एक थे हालांकी अब वह NDTV का हिस्सा नहीं है. एनडीटीवी से अलग होने के बाद उन्होंने अपने डिजिटल प्लेटफॉर्म “डिकोडर” के जरिए नई शुरुआत की है और आज भी उसी जुनून के साथ मैदान में सक्रिय हैं.
नए पीढ़ी के पत्रकार को नई सीख देते : हालांकी की एक बड़ी मीडिया से नीचे की ओर आने के बाद एक नई शुरुआत पश्चिम बंगाल के अलग-अलग इलाकों में घूमकर खुद मोबाइल से इंटरव्यू रिकॉर्ड करते नजर आ रहे डॉ. रॉय नई पीढ़ी के पत्रकारों के लिए एक मजबूत संदेश दे रहे हैं. पत्रकारिता सिर्फ स्टूडियो या बड़े सेटअप तक सीमित नहीं है, बल्कि जमीनी हकीकत तक पहुंचना ही इसकी असली ताकत है. 70 की उम्र पार करने के बावजूद उनका यह जज़्बा यह साबित करता है कि सच्चा पत्रकार कभी रिटायर नहीं होता.
कौन है प्रणय रॉय : एक प्रसिद्ध पत्रकार, अर्थशास्त्री और NDTV के सह-संस्थापक (co-founder) हैं. उन्होंने अपनी पत्नी राधिका रॉय के साथ मिलकर 1988 में NDTV की स्थापना की और भारत में स्वतंत्र टीवी पत्रकारिता व चुनाव विश्लेषण को नई ऊंचाई दी. उन्होंने दूरदर्शन और बीबीसी जैसे मंचों पर एंकरिंग की है. हालांकी अडानी समूह द्वारा NDTV का अधिग्रहण किए जाने के बाद, उन्होंने कंपनी के अधिकांश शेयर बेच दिए.



