पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि जज ने आरोपियों को बरी करने के लिए विपक्षी वकील के साथ डील की है. कोर्ट ने माना सबूतों के बावजूद प्रतिवादी ने पोस्ट की जिम्मेदारी नहीं ली. कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा.

ACTION AGAINST ADVOCATE : दिल्ली हाईकोर्ट ने एक वकील ऊपर बड़ा एक्शन लिया हैं आपको बता दें. वकील पर आपराधिक अवमानना (Criminal Contempt) के आरोप तय किए हैं.
प्रतिवादी का स्वीकार्य से इंकार : सुनवाई के दौरान प्रतिवादी ने इस बात से साफ इनकार कर दिया कि वह लिंकडइन अकाउंट उनका है. हालांकी दिल्ली पुलिस की साइबर सेल को जांच कर विस्तृत रिपोर्ट देने का निर्देश दिया. जांच में सामने आया कि यह अकाउंट 14 अक्टूबर 2023 को बनाया गया था. बेंच ने गौर किया कि सबूतों के बावजूद प्रतिवादी ने पोस्ट की जिम्मेदारी नहीं ली.
हाईकोर्ट ने उन्हें अवमानना (दिल्ली हाईकोर्ट नियम, 2025) के नियम 12 के तहत चार सप्ताह के भीतर अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है. मामले की अगली सुनवाई 26 मई 2026 को होगी, जिसमें प्रतिवादी को व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने का आदेश दिया गया है.
मामला सोशल मीडिया पर एक न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी करने और अदालत की कार्यवाही के दौरान असंसदीय भाषा का प्रयोग करने से जुड़ा है. जस्टिस नवीन चावला और जस्टिस रविंद्र दुदेजा की बेंच ने कहा कि ये आरोप अदालत को कलंकित करने और न्याय प्रशासन में बाधा डालने के इरादे से लगाए गए प्रतीत होते हैं.
क्या था मामला : सोशल मीडिया पर एक न्यायिक अधिकारी के विरुद्ध अपमानजनक टिप्पणी का आरोप हैं. कार्यवाही तीस हजारी कोर्ट के विद्वान JMFC-06 (सेंट्रल) द्वारा 26 मार्च 2025 को भेजे गए एक रेफरेंस के आधार पर शुरू हुई. इस रेफरेंस में 25 जनवरी 2025 को हुई एक घटना का विवरण दिया गया था. कोर्ट के अनुसार, क्रॉस-एफआईआर मामलों में पक्षकार रही प्रतिवादी न केवल सुनवाई में देरी से पहुंचीं, बल्कि उन्होंने पीठासीन अधिकारी के खिलाफ ऊंची आवाज में बात की और असंसदीय भाषा का इस्तेमाल किया. उन्होंने खुले तौर पर आरोप लगाया कि अदालत आरोपियों के साथ मिलीभगत कर रही है. इस घटना के बाद न्यायिक अधिकारी को उनके नाम से किए गए एक लिंकडइन पोस्ट की जानकारी मिली. पोस्ट में यह भी दावा किया गया कि जज ने आरोपियों को बरी करने के लिए विपक्षी वकील के साथ डील की है. कोर्ट ने माना सबूतों के बावजूद प्रतिवादी ने पोस्ट की जिम्मेदारी नहीं ली. कोर्ट ने व्यक्तिगत रूप से उपस्थित रहने को कहा.



