भारत में क्रिसमस का आगमन पुर्तगाली और ब्रिटिश मिशनरियों के साथ हुआ, जिसकी शुरुआत गोवा, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों से मानी जाती है.

CHRISTMAS 2025: क्रिसमस डे ईसाई धर्म का सबसे प्रमुख और पवित्र त्योहार माना जाता है. यह तो सभी जानते हैं कि क्रिसमस डे ईसा मसीह के जन्म की याद में मनाया जाता है. इस दिन चर्चों में प्रार्थनाएं होती हैं, घर सजाए जाते हैं और लोग एक-दूसरे को शुभकामनाएं देते हैं. लेकिन क्रिसमस के पीछे गहरा धार्मिक और ऐतिहासिक महत्व है, जो अंधकार पर प्रकाश का संदेश देता है और आज हम इसी को समझने की कोशिश करेंगे.
हर साल 25 दिसंबर को यह पर्व पूरी दुनिया में श्रद्धा, उल्लास और भाईचारे के साथ मनाया जाता है. चलिए जानते हैं क्यों मनाया जाता है क्रिसमस और इस दिन क्या करते हैं. अगर बात करें पहली बार क्रिसमस मनाने की तो चौथी शताब्दी में रोम में मनाया गया. इसका पहला लिखित उल्लेख 36 ईस्वी में मिलता है. इसके बाद यह उत्सव समय के साथ यूरोप और फिर पूरी दुनिया में फैलता चला गया. भारत में क्रिसमस का आगमन पुर्तगाली और ब्रिटिश मिशनरियों के साथ हुआ, जिसकी शुरुआत गोवा, केरल और पूर्वोत्तर राज्यों से मानी जाती है.
क्यों मनाते हैं क्रिसमस : ईसाई मान्यता के अनुसार, ईसा मसीह ईश्वर के पुत्र थे और उन्हें मानवता का उद्धारकर्ता माना जाता है. उन्होंने प्रेम, क्षमा, सेवा और त्याग का मार्ग दिखाया. उनके जीवन और उपदेशों की स्मृति में यह पर्व मनाया जाता है, ताकि समाज में करुणा और भाईचारे का भाव बना रहे.
कौन हैं सेंटा : सेंटा का वास्तविक नाम संत निकोलस है. संत निकोलस जरूरतमंदों और बीमारों की सहायता के लिए यात्रा किया करते थे. बच्चों को सेंटा क्लॉज़ का बेसब्री से इंतजार रहता है. उन्हें लगता है सेंटा आज भी उनके लिए क्रिसमस पर गिफ्ट लेकर आता है.
क्यों 25 दिसंबर हैं खास : इतिहासकारों के अनुसार, रोमन साम्राज्य में 25 दिसंबर को सूर्य देव यानी Sun God – Sol Invictus का पर्व मनाया जाता था. यह समय शीत अयनांत के आसपास होता है, जब दिन बड़े होने लगते हैं. चौथी शताब्दी में गिरजाघर ने ईसा मसीह के जन्मदिवस को 25 दिसंबर से जोड़ दिया, ताकि सूर्य के प्रकाश के पर्व को आध्यात्मिक प्रकाश यानी कि अंधकार के बाद प्रकाश का प्रतीक के तौर पर बनाया जा सके.



