हालही में पुणे में एक EY कर्मचारी की मौत के बाद कॉरपोरेट जगत में अत्यधिक काम के दबाव को देखते हुए इस बिल को पेश किया गया हैं. हालांकि देखने वाली बात यह होने वाली हैं कि क्या इस बिल से भारतीय उद्योग जगत खुश दिखने वाला हैं.

BILL IN LOKSABHA: संसद में सत्र के दौरान कुछ महत्वपूर्ण बिल पेश किये गए आपको बता दें भारत में वर्क-लाइफ बैलेंस और कर्मचारियों के मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चल रही बहस के बीच, संसद में एक महत्वपूर्ण विधेयक पेश किया गया है. पेश किये गए विधेयक कर्मचारियों को ऑफिस के काम के घंटों के बाद वर्क कॉल और ईमेल को नजरअंदाज करने का कानूनी अधिकार देने की वकालत करता है.
क्या था Right to Disconnect Bill, 2025 : आपको बता दें लोकसभा में कार्यवाही के दौरान सांसद सुप्रिया सुले ने Right to Disconnect Bill, 2025 पेश किया अगर यह बिल कानूनी रूप लेता हैं तो कर्मचारियों को अधिकार होगा कि वे अपनी शिफ्ट खत्म होने के बाद या छुट्टियों के दौरान काम से संबंधित कॉल या मैसेज का जवाब न दें, और इसके लिए उन पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की जा सकेगी. हालही में पुणे में एक EY कर्मचारी की मौत के बाद कॉरपोरेट जगत में अत्यधिक काम के दबाव को देखते हुए इस बिल को पेश किया गया हैं. हालांकि देखने वाली बात यह होने वाली हैं कि क्या इस बिल से भारतीय उद्योग जगत खुश दिखने वाला हैं.
इसके अलावा संसद के सत्र के दौरान और भी कई अहम बिल पेश किये गए जिसमे से मेंस्ट्रुअल लीव (मासिक धर्म अवकाश), कांग्रेस सांसद कादियाम काव्या ने ‘मेंस्ट्रुअल बेनिफिट्स बिल, 2024’ पेश किया, जिसमें कार्यस्थल पर महिलाओं के लिए सुविधाओं की मांग की गई है. इसके अलावा डीएमके सांसद कनिमोझी करुणानिधि ने मृत्युदंड को समाप्त करने के लिए तो निर्दलीय सांसद विशालदादा प्रकाशबापू पाटिल ने पत्रकारों और उनकी संपत्ति की सुरक्षा के लिए ‘जर्नलिस्ट (प्रिवेंशन ऑफ वायलेंस एंड प्रोटेक्शन) बिल, 2024’ पेश किया, इसका उद्देश्य पत्रकारों और उनकी संपत्ति को हिंसा से बचाना और उन्हें सुरक्षा देना है.
समझें निजी विधेयक : निजी विधेयक सांसदों को अपनी पसंद के मुद्दे पर कानून बनाने का प्रस्ताव रखने का मौका देते हैं, लेकिन ज्यादातर ऐसे बिल सरकार के जवाब के बाद वापस ले लिए जाते हैं. यह सरकार की ओर से पेश होने वाले विधेयकों से अलग होते हैं. भारत में लोकसभा या राज्यसभा का कोई भी सांसद जो मंत्री न हो, निजी विधेयक पेश कर सकता है. इसका उद्देश्य आमतौर पर जनहित के मुद्दे उठाना, कानून में संशोधन प्रस्तावित करना या नया कानून बनाना होता है. पर यहाँ नोट करने वाली बात यह हैं कि इस बिल को कोई भी सांसद पेश कर सकता हैं न कि मंत्री.



