मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की और कहा कि हम जानना चाहेंगे कि इतनी गंभीर चूक कैसे हुई और याचिकाकर्ता सात साल की पूरी सजा काटने के बाद भी 8 साल से अधिक समय तक जेल में क्यों रहा. इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य को इस लंबी कैद के लिए स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है.

SC : कानूनी रूप से अनिवार्य सजा पूरी होने के बाद भी आठ साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया. जिसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश सरकार से मामले में स्पष्टीकरण मांगा.
सज़ा पूरी होने के बाद आठ साल जेल मे : आपको बता दें मामले पर भारत की सुप्रीम कोर्ट ने स्पष्टीकरण माँगा ज़ब याचिकाकर्ता को उसकी कानूनी रूप से अनिवार्य सजा पूरी होने के बाद भी आठ साल से अधिक समय तक जेल में रखा गया. इस गंभीर मामले पर न्यायमूर्ति जे.बी. पारदीवाला और न्यायमूर्ति के. वी. विश्वनाथन की दो-न्यायाधीशों की पीठ ने मामले के तथ्यों को काफी चौंकाने वाला बताया.
क्या था मामला : याचिकाकर्ता सोहन सिंह पर भारतीय दंड संहिता (आईपीसी) की धारा 376 (1), 450 (आजीवन कारावास से दंडनीय अपराध करने के लिए गृह-अतिचार), और 506B के तहत दंडनीय अपराधों का आरोप लगाया गया था. जिसमे उनको दोषी निचली अदालत ने 2000/- रुपये के जुर्माने के साथ आजीवन कारावास की सजा सुनाई थी. जिसके बाद याचिकाकर्ता ने मध्य प्रदेश हाईकोर्ट का रुख किया और आईपीसी की धारा 376, 450, और 506-बी के तहत दोषसिद्धि को बरकरार रखते हुए, हाईकोर्ट ने धारा 376 के तहत बलात्कार के अपराध के लिए सजा को 10 अक्टूबर, 2007 को आजीवन कारावास से घटाकर सात साल के सश्रम कारावास में बदल दिया और सभी सजाएं एक साथ चलेंगी का आदेश दिया.
ज़ब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के संज्ञान मे विशेष अनुमति याचिका (आपराधिक) के माध्यम से आया. सुप्रीम कोर्ट ने कहा, चिंता का विषय यह है कि यद्यपि हाईकोर्ट ने अपील को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए आजीवन कारावास की सजा को 7 साल के सश्रम कारावास में बदल दिया था, लेकिन याचिकाकर्ता को 6-6-2025 को ही जेल से रिहा किया गया. इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने अहम टिप्पणी की और कहा कि हम जानना चाहेंगे कि इतनी गंभीर चूक कैसे हुई और याचिकाकर्ता सात साल की पूरी सजा काटने के बाद भी 8 साल से अधिक समय तक जेल में क्यों रहा. इसी मामले पर सुप्रीम कोर्ट ने मध्य प्रदेश राज्य को इस लंबी कैद के लिए स्पष्टीकरण देने का आदेश दिया है.